70 हजार स्कूली अथितियों को मामा ने महाविद्यालयीन अथितियों के मुकाबले नियमित नहीं किया

विवेक मालवीय

पीले चावलों से न्योत प्रदेश भर से बुलाए गए 70 हजार स्कूली अथितियों को मामा ने महाविद्यालयीन अथितियों के मुकाबले न तो नियमित किया। न विभिन्न सरकारी सुविधाओं का लाभ दिया न भविष्य का बीमा किया। बस दोगुना मानदेय का झुनझुना तब तक बजाते रहेंगे तब तक उनके विषय का नियमित शिक्षक आमद दर्ज न कराए। जैसे से नियमित शिक्षक को पदस्थी मिली वैसे ही अतिथि का रवन्ना कटा। अथिति की बरसो की त्याग,तपस्या,सेवा, आहुतियों का पलभर में बंटाधार।
वे न तो घर के ओर न घाट के रहे। कुछ नया ओर स्थाई रोजगार अर्जित करने की उम्र तो बतौर अथिति खपा दी।
सबसे ज्यादा फजियत महिला अथिति शिक्षकों की होनी है। उनमें भी विवाहित अथिति पिसाएगी। सुसराली तानों,उत्पीड़न से शायद ही कोई महिला अतिथि पार पा सके।पता नही दोहरा तनाव क्या गुल खिलायेगा।
ऐसा नही सर्जरी में माहिर cm चौहान मामा को भांजियो की आसन्न फजीहतों का अंदाजा न होगा। होगा। मगर नोकरशाही ने मामा के साथ खेला करके लगता कांग्रेस की लॉटरी खोल दी। कांग्रेस की निगाह शिरू से ही अथितियों के 70 हजार परिवारों के 03 लाख 50 हजार वोटों पर है। लगता कांग्रेस के फेके पासे से मामा बाजी हार गए।
बाजी तो 70 हजार अतिथि भी हारे।पता नही कब नियमित शिक्षक बनाम राहु ग्रस भविष्य का बंटाधार कर दे। क्योकि पोर्टल तो पद खाली ही घोषित करेगा।

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