*राजनीती :
**कौन बनेगा जिला राजगढ़ मे भाजपा कि नैया का खिवैया, कौन है कांग्रेस का तारणहार, किसकी कहां कितनी पकड़ आइए जाने**

विवेक मालवीय – राजगढ़ जिले कि पांच विधानसभा क्षेत्रों मे फिलहाल कांग्रेस के पास ठोस और जिताऊ दावेदार है। जो चेहरे सामने आ रहे है उसके अनुसार तो इस बार भी भाजपा को कड़ी टक्कर मिलने वाली है। पर भाजपा ने कच्ची गोलियां नहीं खेली है। भाजपा कि इस बार कि चुनावी रणनीति पिछले सभी चुनावों से ज्यादा प्रभावी बनकर सामने आई है ऐसे मे भाजपा भी पांचो सीट को छीनकर जिले मे रिकार्ड बनाना चाहती है।

*खिलचीपुर मे कांग्रेस सशक्त*

खिलचीपुर मे कांग्रेस के पास एक निष्पक्ष राजनीतिज्ञ कि छवि वाला चेहरा पूर्व ऊर्जामंत्री प्रियव्रतसिंह है। जिनका कोई तोड़ भी दोनों दलों के पास नहीं है। वहीं भाजपा के पूर्व विधायक हजारीलाल दांगी पिछली हार के बाद भी अपनी छवि बना पाए है. इनके अलावा नए चेहरे के रूप मे दिनेश पुरोहित राजनितिक विकल्प बनकर उभरे है।

*राजगढ़ के समीकरण*

राजगढ़ जिला मुख्यालय पर कांग्रेस के पास वर्तमान विधायक बापूसिंह तंवर जैसे सशक्त दावेदार है। ऐसे भाजपा के लिए टिकट कि दावेदारी करने वाले दर्जनभर दावेदारों मे दो चेहरे काफ़ी प्रभावी एवं सशक्त है। इनमे पहला नाम प्रताप मंडलोई का है। मंडलोई ने पिछले चुनाव निर्दलीय रहने के बाद भी कड़ी टक्कर दी थी। लेकिन इस बार उन्हें भाजपा का साथ मिला है। वहीं दूसरा चेहरा देवीसिंह सोंधिया का है. जो बजरंगदल जिला प्रमुख के रूप मे अपनी अलग पहचान बनाने मे कामयाब हुए है। वहीं मंडलोई के पास भाजपा का अपना वोटबैंक के अलावा सोंधिया वोट का अपना बड़ा वोटबैंक है। ऐसे मे सबसे पहले मंडलोई से सशक्त दावेदार और कोई नहीं है।


*ब्यावरा मे कौन बनेगा भाजपा का खिवैया*

ब्यावरा मे कांग्रेस के पास वर्तमान विधायक रामचंद्र दांगी और पूर्व विधायक पुरुषोत्तम दांगी दो बड़े चेहरे है। रामचंद्र दांगी का पूर्व हार का रिकार्ड भी देखा जाए तो कोई बड़ी हार उनकी नहीं हुई। लेकिन जीत का अंतर भी उतना ही रहा है। जबकि पुरुषोतम दांगी कि छवि इसके भी उलट ज्यादा प्रभावी है। उन्होंने पिछले दस साल मे अपनी निजी छाप जनता पर छोडी है। जबकि भाजपा के पास जितने भी नाम सामने आ रहे है उनमे एक मात्र दावेदार जसवंत गुर्जर ही सबसे ज्यादा प्रभावी नाम है। उसका एक कारण यह भी है कि गुर्जर परिवार ने ब्यावरा मे अभी तक एक भी चुनाव मे हार नहीं देखी है। चाहे उनके पिता बलरामसिंह गुर्जर कि विधायकी का दौर रहा हो या उनकी पत्नी का जिला पंचायत एवं छोटे भाई का जनपद चुनाव का दौर, इनके अलावा भी सरपंची से लेकर जिला पंचायत तक हमेशा जीत दर्ज कि और क्षेत्र मे अपनी जिताऊ छवि कि पहचान कायम कि है। जबकि हमारे निजी सर्वे मे अन्य इतने ज्यादा प्रभावी नहीं रहे है। ऐसे मे कांग्रेस को पटखनी देने के लिए जसवंत गुर्जर का नाम सर्वोपरि है।


*नरसिंहगढ मे फिर रिपीट लेकिन नए चेहरे कि मांग*

भाजपा और कांग्रेस कि रणनीति के अनुसार नरसिंहगढ मे फिर से कांग्रेस से गिरीश भंडारी और भाजपा से राज्यवर्धनसिंह का टिकिट रिपीट होता दिख रहा है। लेकिन दोनों ही पार्टी के कार्यकर्ता नए चेहरे कि मांग पर अड़े हुए है। कांग्रेस के पास नए चेहरे मे रघु परमार का नाम सामने आ रहा है। रघु परमार हालांकि इंदौर कि राजनीती मे ज्यादा सक्रिय रहे है पर पिछले छह महीने से नरसिंहगढ कि राजनीती मे सक्रियता बनाए हुए है। जबकि भाजपा के पास राज्यवर्धनसिंह का टिकिट कटने कि स्थिति मे नए चेहरों मे जो नाम सामने आए उनमे एक भी टिकाऊ नहीं है। वैकल्पिक रूप से प्रभावी चेहरों मे मनीष सक्सेना पूर्व जिला महामंत्री का नाम सामने लाया जा सकता है। उसकी एक वजह यह भी है कि 1967 मे जनसंघ से विधायक रहे कृष्णमोहन सक्सेना ने कायस्थ राजनीती मे अपनी महत्वपूर्ण छाप छोडी थी।



*भाजपा के गढ़ सारंगपुर मे असमंजस*

सारंगपुर मे अपने पिता कि छवि के कारण एक बार नहीं दो बार चुनाव जीते विधायक कुंवर कोठार क्षेत्र के कुछ राजनीतीक मतलब हल करने वालों के बीच उलझकर रह गए है। यहां सरेआम उनके घर से दुकान चलने कि सुर्खियां भी सामने आई। विकास यात्रा मे विरोध भी सामने आया ऐसे मे टिकिट कटना स्वाभाविक है। लेकिन नए चेहरों मे उनके ही भुआ के लडके और पूर्व विधायक अमरसिंह कोठार के असिस्टेंट के रूप मे अपनी पहचान बना चुके मोहन सोलंकी और दूसरे दावेदार के रूप मे संदेश राजौरे बनकर उभरे है। दोनों कि पकड़ मजबूत भी है. लेकिन पचोर से चल रही राजनीती मे जीवन नायक का नाम भी सामने आ रहा है। जबकि कांग्रेस के पास महेश मालवीय, घनश्याम मालवीय और रोशनखत्री सब नए चेहरे है। यहां टिकिट कि घोषणा के बाद ही ऊंट किस करवट बैठेगा कहा जा सकता है। हालांकि पचोर तहसील भाजपा का वोटबैंक गढ़ है वहीं सारंगपुर कांग्रेस का वोटबैंक गढ़ है। ऐसे मे कांटे कि टक्कर के साथ हारजीत का अंतर 4-5 हजार का ही रहेगा।

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